नशा एक हलाक़त




उसने बड़ी मुश्किल से ग़र्दन घुमा कर नज़र अपने बेटे की तरफ़ घुमाई, उस प्यारे से चेहरे को फिर कभी ना देख पाने का दुःख उसके चेहरे पर साफ़ झलक रहा था दूसरी तरफ़ उसकी पत्नी जो उसके बाद अकेली हो जाने वाली थी बे-दर्द दुनिया का उसकी पत्नी और उसके बच्चो के साथ क्या सुलूक होगा सोच कर उसकी आत्मा शरीर से निकलने से डर रही थी |
उसकी एक आदत ने उसकी जान ले ली, उसने हलकी उम्र से ही नशीले पदार्थो का सेवेन शुरू कर दिया था नशे ने उसके जिस्म को धीरे-धीरे खोखला कर दिया जिसके कारण उसके शरीर को  घातक बीमारियो ने जकड़ लिया था अब वो दरमियानी उम्र में ही बिस्तर पर माज़ूर और मजबूर हो कर दम तोड़ रहा था |
नशीले-मादक पदार्थो का सेवन हलाक़त की तरफ ही ले जाता है जितनी साँसे है वो तो इंसान पूरी करता ही है मगर ऐसा जीना भी क्या जीना के इंसान रब से सिवा किसी और का मोहताज़ हो जाय |
हर इंसान जानता है नशा इंसान के अनमोल शरीर को धीरे-धीरे अंदर से खोखला करता है, इसके बेहद गंभीर परिणाम होते है बावजूद इसके इस प्रवृत्ति में लगातार बढ़ोतरी हो रही है
हुक्का, सिगरेट, खैनी, गुट्खा, शराब आदि इन ज़हरीले पदार्थो से शरीरिक, मानसिक ही नहीं वातावरण भी दूषित हो रहा है, नशीले पदार्थ बढ़ते अपराध का एक बड़ा कारण भी है |
अपने चारो और नज़र डालू तो नौजवान नशे से अपने शरीर को बहुत तेज़ी से ज़ाया कर रहे है धुम्रपान तो जैसे आज का फैशन हो गया, ये भी याद रहे धुम्रपान, बीडी, सिगरट विदेशी संस्कृति का हिस्सा है जो हमारी नई खेप को ज़बरदस्त तरीक़े से मुतास्सिर कर रहा है
मेरी समझ में ये आज तक नहीं आया लोग क्यों नशा करते है जबके इससे धन, मन, तन तीनो के घातक नुक्सान होते है, अगर हमें इस अभिशाप से अपने बच्चो और टीनेज़र्स को बचाना है तो हम सबको अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार प्रयास करना होगा |
इस लेख का उद्देश्य नशीले-मादक पदार्थो के विरुद्ध जागरूक करना है |

साजिद की क़लम

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फितने : 001

हज़रत औफ़ बिन मालिक अशजई रज़ि० फ़रमाते है कि रसुलुल्लाह सल्ल० ने मुझ से फ़रमाया ऐ औफ़ याद रखना क़यामत से पहले छ: फितने रूनुमा होंगे |

अव्वल: मेरी वफ़ात | इस पर मै रो पड़ा तो रसुलुल्लाह सल्ल० ने मुझे ख़ामोश किया | फिर फ़रमाया

दोम: फ़तहे बैतूल मुक़द्दस |

सोम: वह मौत जो मेरी उम्मत में इस तरह होगी जैसे बकरियों की बीमारी लगने के बाद बहुत सारी बकरियों कि एक दम मौत आ जाती है |

चहारुम: वह फितना जो मेरी उम्मत में रूनुमा होगा |

पंजुम: तुम्हारे अंदर माल कि इस क़दर बोहतात हो जाएगी कि आदमी को सौ दीनार दिया जाए उस पर भी वह राज़ी न होगा |

शुशुम: तुम्हारे और रुमियो के दर्मियान सुलह हो जायगी फिर वह तुम से आकर जंग करेंगे उस रोज़ मुसलमान दमिश्क़ के इलाक़ए गोता में होंगे |

(सहीह बुख़ारी: 6/277, इब्ने माज़ा: 42,4)

गलतियों को अल्लाह माफ़ फ़रमाय

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