सोमवार, मार्च 16, 2015

नशा एक हलाक़त




उसने बड़ी मुश्किल से ग़र्दन घुमा कर नज़र अपने बेटे की तरफ़ घुमाई, उस प्यारे से चेहरे को फिर कभी ना देख पाने का दुःख उसके चेहरे पर साफ़ झलक रहा था दूसरी तरफ़ उसकी पत्नी जो उसके बाद अकेली हो जाने वाली थी बे-दर्द दुनिया का उसकी पत्नी और उसके बच्चो के साथ क्या सुलूक होगा सोच कर उसकी आत्मा शरीर से निकलने से डर रही थी |
उसकी एक आदत ने उसकी जान ले ली, उसने हलकी उम्र से ही नशीले पदार्थो का सेवेन शुरू कर दिया था नशे ने उसके जिस्म को धीरे-धीरे खोखला कर दिया जिसके कारण उसके शरीर को  घातक बीमारियो ने जकड़ लिया था अब वो दरमियानी उम्र में ही बिस्तर पर माज़ूर और मजबूर हो कर दम तोड़ रहा था |
नशीले-मादक पदार्थो का सेवन हलाक़त की तरफ ही ले जाता है जितनी साँसे है वो तो इंसान पूरी करता ही है मगर ऐसा जीना भी क्या जीना के इंसान रब से सिवा किसी और का मोहताज़ हो जाय |
हर इंसान जानता है नशा इंसान के अनमोल शरीर को धीरे-धीरे अंदर से खोखला करता है, इसके बेहद गंभीर परिणाम होते है बावजूद इसके इस प्रवृत्ति में लगातार बढ़ोतरी हो रही है
हुक्का, सिगरेट, खैनी, गुट्खा, शराब आदि इन ज़हरीले पदार्थो से शरीरिक, मानसिक ही नहीं वातावरण भी दूषित हो रहा है, नशीले पदार्थ बढ़ते अपराध का एक बड़ा कारण भी है |
अपने चारो और नज़र डालू तो नौजवान नशे से अपने शरीर को बहुत तेज़ी से ज़ाया कर रहे है धुम्रपान तो जैसे आज का फैशन हो गया, ये भी याद रहे धुम्रपान, बीडी, सिगरट विदेशी संस्कृति का हिस्सा है जो हमारी नई खेप को ज़बरदस्त तरीक़े से मुतास्सिर कर रहा है
मेरी समझ में ये आज तक नहीं आया लोग क्यों नशा करते है जबके इससे धन, मन, तन तीनो के घातक नुक्सान होते है, अगर हमें इस अभिशाप से अपने बच्चो और टीनेज़र्स को बचाना है तो हम सबको अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार प्रयास करना होगा |
इस लेख का उद्देश्य नशीले-मादक पदार्थो के विरुद्ध जागरूक करना है |

साजिद की क़लम

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