बुधवार, जुलाई 20, 2016

तौबा...



जब हम से कोई गलती हो जाय और हम उस गलती को मानने के लिए तैयार ना हो बल्कि अपनी गलती को सही साबित करने की कोशिशि में लग जाय और अपने साथियो की हिमायत से खुद उन लोगों से लड़ने लगे जो हमें हमारी गलती से आगाह कर रहे है जब हम अपनी गलती पर इस तरह अकड़ते है और जो लोग हमारा साथ देते है तो हम और हमारे हिमायती अल्लाह के नज़दीक बदतरीन मुजरिम हो जाते है हम अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए जिन अल्फाज़ का सहारा लेते है वह अलफ़ाज़ आख़िरत में बिलकुल बे-हैसियत साबित होंगे और जिन हिमायतियों पर हम भरोसा और घमंड कर रहे है वह हमारे लिए कुछ काम ना आ सकेंगे|

गलती को मानकर तौबा करना बेहतरीन अमल है |

शुक्रवार, अप्रैल 08, 2016

ज़िन्दगीबख्श ख़ुसूसियात



मौजूदा दुनिया में जो हालात है महज़ इम्तिहान के लिए है इम्तिहान की मुर्रर मुद्दत ख़त्म होने के बाद ये हालात बाक़ी नहीं रहेंगे इसके बाद ज़मीन की सारी ज़िन्दगीबख्श ख़ुसूसियात ख़त्म कर दी जायंगी
ज़मीन ऐसी खाली जगह हो जायगी जहा ना किसी के लिए अकड़ने का सामान होगा और ना फ़ख्र करने का |

मंगलवार, अप्रैल 05, 2016

सहुलियतें



अल्लाह का एहसान है कि उसने इंसान / हमें वजूद अता किया और फिर यु ही नहीं छोड़ दिया, हमें रहने को ऐसी ज़मीन दी जो इंसान के लिए बेहद उम्दा / अनुकूल है, बात सिर्फ इतनी नहीं बल्कि इससे बहुत आगे की है, इंसान / हम हर वक़्त ऐसी नाज़ुक हालत में रहते है के कभी भी मौत आ जाय और इंसान को कायनात के मालिक के सामने हिसाब-किताब के लिए पेश कर दिया जाए| इन सब बातों का तकाज़ा है के इंसान पुरे तौर पर अल्लाह का हो जाए, ज़िन्दगी के मकसद को समझे, गौर करे, फिक्र करे, सहुलियतें जुटाना ही तो ज़िन्दगी नहीं |

रविवार, अप्रैल 03, 2016

बदतरीन मुजरिम



दुनिया में किसी को कुछ भी मिलता है तो वो अल्लाह की तरफ़ से है
इसलिए किसी को अच्छे हाल में देख कर जलना और उसके नुक्सान की कोशिश करना ऐसे है जैसे अल्लाह के मंसूबे को बातिल करने की कोशिश करना, क्योके दुनिया दारुलअसबाब है इसलिए एक हद तक तो इंसान को अमल करने का मोका मिलता है मगर अल्लाह की नज़र में वह बदतरीन मुजरिम है, अल्लाह ने जिसको जो दिया है उसके लिए वही बेहतर है |   

गुरुवार, मार्च 31, 2016

माल-ए-ग़ैर



दुनिया में जो कुछ है वह सब हमारे लिए माल-ए-ग़ैर है, क्योके सब कुछ अल्लाह का है उसे अपने लिए जाईज़ करने की वाहिद सूरत है के अल्लाह के बाताए तरीक़े से हासिल किया जाए और उसे अल्लाह के बताए तरीक़े से इस्तेमाल किया जाए |

बुधवार, मार्च 30, 2016

रहबर ...

जो लोग सारी दुनिया को राह दिखाने वाले थे
क्या वो आज खुद भटक रहे है .... ?

कुरआन को इमाम बनाना एकमात्र रास्ता है, जिसका इमाम कुरआन है वही हक पर है, बाक़ी दुनियापरस्तों की पहचान इतनी मुश्किल भी नहीं ........

दरअस्ल हमसे दुनिया की लाज्ज़तें नहीं छूट रही !



नमाज़



नमाज़ इंसान को बुराईयों से पाक करती है, जब हम नमाज़ का इरादा करते है तो पहले पानी से वुज़ू करते है पानी बहुत बड़ी नेमत है जो इंसान के लिए हर किस्म की गन्दगी को धोने का बेहतरीन जरिया है, इसी तरह नमाज़ भी एक रब्बानी चश्मा है जिसमे नहाकर इंसान अपने आपको बुरे जज़्बात और गंदे खयालात से पाक करता है, नमाज़ बेहद कीमती है इसको हर हाल में कायम करना है |

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