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सिफारिश

कायनात में मुख्तलिफ किस्म की चीज़े है इल्मी मुताला बताता है के इन चीजों का ज़हूर एक ही वक़्त में नहीं हुवा बल्कि एक के बाद एक हुवा है, कायनात का मुताला बताता है की इस कायनात का निजाम हद दर्जा मोहकम नियमों के तहत चल रहा है

हर चीज़ ठीक उसी तरह अमल करती है जिस तरह सामूहिक तकाज़े के तहत उसे अमल करना चाहिए यह तरतीब इस बात का सबूत है की इस निज़ाम-ए-कायनात का एक जिंदा मुदब्बिर है, जो हर लम्हा उसका इंतज़ाम कर रहा है कायनात का ये हैरान कर देने वाला निज़ाम खुद ही पुकार रहा है की उसका मालिक इतना कामिल और इतना अज़ीम है के जिसके यहाँ किसी सिफारिशी की सिफारिश चलने का कोई सवाल ही नही | में किसी की तरफ़ इशारा नहीं कर रहा में खुद में ढूढ़ रहा हु, में गाफ़िल तो नहीं !

(अल्लाह जिसको चाहे सिफारिश की इजाज़त दे)


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