शुक्रवार, मार्च 18, 2016

शिफारिश

कायनात में मुख्तलिफ किस्म की चीज़े है इल्मी मुताला बताता है के इन चीजों का ज़हूर एक ही वक़्त में नहीं हुवा बल्कि एक के बाद एक हुवा है, कायनात का मुताला बताता है की इस कायनात का निजाम हद दर्जा मोहकम नियमों के तहत चल रहा है
हर चीज़ ठीक उसी तरह अमल करती है जिस तरह सामूहिक तकाज़े के तहत उसे अमल करना चाहिए यह तरतीब इस बात का सबूत है की इस निज़ाम-ए-कायनात का एक जिंदा मुदब्बिर है, जो हर लम्हा उसका इंतज़ाम कर रहा है कायनात का ये हैरान कर देने वाला निज़ाम खुद ही पुकार रहा है की उसका मालिक इतना कामिल और इतना अज़ीम है के जिसके यहाँ किसी सिफारिशी की सिफारिश चलने का कोई सवाल ही नही | में किसी की तरफ़ इशारा नहीं कर रहा में खुद में ढूढ़ रहा हु, में गाफ़िल तो नहीं !
(अल्लाह जिसको चाहे शिफारिश की इजाज़त दे)

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