Showing posts with label urdu poetry. Show all posts
Showing posts with label urdu poetry. Show all posts

चलने को तैयार होना चाहिए

पलकों में थोड़ी हया, यार होना चाहिए !!
इश्क़-ए-हक़ीक़ी से हमें, दो-चार होना चाहिए!

चेहरा बदलकर जी रहे है, लोग ज़ुल्मत में यहाँ!
खोल आँखे दिल की अब, बेदार होना चाहिए !!

हसरतें और ख्व़ाब मेरे आसुओं में गुम हुवे !!
अब हमें दुनिया से फिर, बेज़ार होना चाहिए!

बज़्म-ए-दुनिया है हक़ीर, इस से नाता तोड़ ले !!
दोस्तों फानी है ये,चलने को तैयार होना चाहिए!

एम साजिद 
 
 

Read More...

आज़माईश

ये तमाम ज़िन्दगी सलीब-ए-आज़माईश है तेरी।
गफलतों से उभर कर, सुबह-शाम कर यु बक़ा है तेरी।
-एम साजिद 

Read More...
 
Copyright (c) 2010. The Straight Path All Rights Reserved.